यह लेख द इंडियन एक्सप्रेस  के द आइडियाज पेज  पर छपे लेख प्राइड एंड प्रेज्यूडिस  की हिंदी में प्रस्तुति है. इस लेख को लिखने वाले बद्रीनारायण, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, इलाहाबाद में प्रोफेसर हैं. आप कविताएं भी...
अमेरिकन अख़बारों में एक बेहतरीन चलन है. वह उम्मीदवार द्वारा चुनाव से पहले किये जाने वाले दावों/वादों की कठोर समीक्षा करते हैं. कई बार अखबार वादाखिलाफी या मुद्दों पर स्टैंड में बदलाव को ले कर लम्बे समय तक अभियान...
जॉन एलिया वजूद के हर एक इंच तक शायर थे जिंदगी से रूठी हुई रचनाओं से मेरा बहुत करीब का वास्ता है. यह रचनाएँ, चाहें वह किसी भी प्रारूप में हों, मुझे अपनी ओर खींचती रही हैं. इस खिंचाव की...
आखिरी बहुज्ञानी: बेनेडिक्ट एंडरसन एक विद्वान और इंसान के तौर पर (रामचंद्र गुहा ने यह लेख करीब दो साल पहले बेनेडिक्ट एंडरसन के देहांत के बाद प्रतिष्ठित अंग्रेजी रिसर्च पत्रिका इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के लिये लिखा था. यहां हम...
शिव विश्वनाथन भारत के उन चुनिंदा विद्वानों में से एक हैं जिन्हें विज्ञान और समाज के आपसी संबंधों की गंभीर समझ है। देश-विदेश की प्रमुख पत्रिकाओं में उनके आलेख समय-समय पर प्रकाशित होते रहते हैं। उनकी एक किताब प्रकाशित...

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