काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हुए अपने अभिनन्दन समारोह में भूतपूर्व कुलपति जी सी त्रिपाठी ने कहा कि 'हाँ, मैंने मजबूरी में अयोग्यों की भी नियुक्ति की।' यह एक वाक्य भारतीय शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा के कारणों को सामने ला...
अरविंद केजरीवाल ने अरूणा राय की बात नहीं मानी। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत बहुतों ने उनकी बात नहीं मानी क्योंकि उन्हें लगा कि सोशल मीडिया के माध्‍यम से युवाओं का जो विशाल समर्थन मिल रहा है उसे...
गुजरात ग से शुरू होता है, उत्तर प्रदेश में उ से. दोनों जगह के चुनाव में भी यही अंतर हुआ करता था. फिर दोनों को मिला दिया गया. गउ या गू, अपनी अपनी श्रद्धानुसार. दोनों ही जगहों पर जाति...
मेरे गुरू जी कहते हैं कि कभी भी सिनेमा की समीक्षा उसके तकनीकी पहलुओं पर नहीं करनी चाहिये. सिनेमा एक आर्ट फॉर्म है, जिसमें प्रभावोत्पादकता होती है. फिल्म रिव्यू साधारण दर्शक के लिये लिखे जाते हैं इसलिये फिल्मों की...
यह अनुवाद 'कबाड़खाना' ब्लॉग से साभार है जिसका कबाड़खाने के कबाड़ी अशोक पांडे ने अनुवाद किया है. कबाड़खाना पर यह 26 अक्टूबर, 2014 को प्रकाशित हुआ था. _____________________________________________________________________ फेसबुक पर कल स्टीफन हॉकिंग  (Stephen Hawking) की पहली फेसबुक पोस्ट का ज़िक्र मेरे...
महात्‍मा गांधी की मृत्‍यु को लेकर एक सवाल मन में गूंजता रहता है कि वह किसी षडयन्‍त्र का परिणाम थी या प्रभु की लीला थी। प्रश्‍न चुनौतीपूर्ण और जटिल है। परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें इसका अनुत्‍तरित रह जाना स्‍वा‍भाविक...
केंद्र सरकार ने रोजगार सृजन के तमाम वादे किये हैं. नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी रैलियों में कहा था कि हर साल एक करोड़ रोजगार पैदा किये जायेंगे. इसके बावजूद देश में बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही है. श्रम...
सुशांत कुमार शर्मा जेएनयू से हिंदी साहित्य में स्नातक करने के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल पूरी करके वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उत्तर भारत के तीन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर चुके...
सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा की गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐतिहासिक और अप्रत्याशित थी. हालांकि इसमें ऐसा कोई खुलासा नहीं हुआ, जिसके लिए अमूमन प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती है. खुलासे की सम्भावना लिए पत्रकार जजों को अपने सवालों से उकसाते...
मोहनदास करमचंद गांधी, यह नाम आधुनिक भारत के इतिहास को दो स्पष्ट काल खंडों में बांटता है- गांधी के समय का भारत और गांधी के बाद का भारत. गांधी के बाद के भारत की यात्रा 30 जनवरी 1948 से...

सोशल मीडिया

0FansLike
48FollowersFollow

हमारी पसंद

विज्ञापन

- Advertisement -