अनिमेष मुखर्जी बंगाली हैं पर कलकत्ता से नहीं हैं, फर्रुखाबाद से हैं. पर आप एक भद्रलोक बंगाली की तरह इनसे चित्रकला से लेकर मूर्तिकला और राजनीति से लेकर सिनेमा तक की चर्चा आसानी से कर सकते हैं. ऊब जायें...
सबसे पहले तो प्रिय पाठकों देरी के लिये हमें क्षमा करें. 19 दिसंबर को गोविंद निहलानी का जन्मदिन होता है और यह आलेख आपको आज पढ़ने को मिल रहा है. ____________________________________________________________________________ एक इंसान के सोचने का तरीका कैसा है! यही निर्धारत...
प्रिय साथी, मनुष्य जितनी व्याकुलता से किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करता है जो उसे तत्परता से सुन सकता हो या जिससे वह बोल सके, उतनी ही अकुलाहट से मनुष्य किसी ऐसे व्यक्ति की भी तलाश में लगा रहता है...
प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. _________________________________________________________________________ कार्ल मार्क्स का कहना था कि पैसा...
रात को यही कोई 9 के आसपास खबर मिली की केदार बाबा नहीं रहे। मैंने इस सूचना की पुष्टि करने का प्रयास नहीं किया। किया भी नहीं जाना चाहिए। भला कौन वायरल कंटेट की तर्ज पर किसी कवि की...
निर्मल वर्मा लिखते हैं - कभी-कभी मैं सोचता हूँ, कि किसी सूनी दुपहर में जब एक ब्याही लड़की का पति अपने कोर्ट, फ़र्म या दफ्तर में होता है और बच्चे स्कूल जा चुके होते हैं -- ये लड़कियां अवश्य...
विश्व पुस्तक मेले का दिल्ली के प्रगति मैदान में आज से आगाज़ हो रहा है. ऐसे में कई नई-पुरानी किताबों की चर्चा होगी. पर मैं थोड़ा ओल्ड स्कूल हूं और इस मामले में भारतीय चिंतन परंपरा की पारायण विधा...
सुशांत कुमार शर्मा जेएनयू से हिंदी साहित्य में स्नातक करने के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल पूरी करके वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उत्तर भारत के तीन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर चुके...
प्रिये साथी! तुम जानते हो मुझे आये दिन बेवजह ही प्रेम में पड़ जाने की आदत है। मैं एक घुमंतू प्रेमी हूँ। जिसे घूमते भटकते लोगों से प्रेम हो जाया करता है। यह प्रेम बहुत लंबे समय तक नही टिकता।यह...
15 अगस्त 1947 को जब देश आज़ाद हवा में साँस ले रहा था। उस वक्त उस हवा में संगीत का सुर घोल रहे थे- बिस्मिल्ला खां। आज़ादी का स्वागत करने के लिए पंडित नेहरू ने बिस्मिल्ला खां को दिल्ली...

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