यह एक ऐसा लेख है जिसकी भूमिका नहीं लिखी जा सकती। दरअसल, यह विदा के बारे में हैं। यह दुःख के बारे में है जो मौन कर देता हैं लेकिन यह लेख लिखा जाना इसलिए जरुरी था क्योंकि यह...
कुँवर नारायण अभी बाक़ी हैं कुछ पल, और प्यार का एक भी पल बहुत होता है... प्यार की अमरता का गान करने वाले कवि कुंवर नारायण साल 2017 के 15 नवंबर को इहलोक को छोड़ गए। कुंवर नारायण नहीं रहे लेकिन उनके शब्द...
प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. _________________________________________________________________________ अक्सर हम रोज़मर्रा के जीवन में ‘गो...
दिन बहुत साधारण था। हवाओं में स्वाभाविक सी ठंड थी और मन में उम्र प्रेरित हलकी सी बेचैनी लेकिन यह सूरत तब बदल गयी जब अचानक पता चला कि नागराज मंजुले आ रहे हैं और दिलो-दिमाग पर ख़ुशी और...
सबसे पहले तो प्रिय पाठकों देरी के लिये हमें क्षमा करें. 19 दिसंबर को गोविंद निहलानी का जन्मदिन होता है और यह आलेख आपको आज पढ़ने को मिल रहा है. ____________________________________________________________________________ एक इंसान के सोचने का तरीका कैसा है! यही निर्धारत...
सुशांत कुमार शर्मा जेएनयू से हिंदी साहित्य में स्नातक करने के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल पूरी करके वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उत्तर भारत के तीन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर चुके...
जॉन एलिया वजूद के हर एक इंच तक शायर थे जिंदगी से रूठी हुई रचनाओं से मेरा बहुत करीब का वास्ता है. यह रचनाएँ, चाहें वह किसी भी प्रारूप में हों, मुझे अपनी ओर खींचती रही हैं. इस खिंचाव की...
कठफोड़वा.कॉम की नई साथी मनुकृति जबलपुर में रहती हैं. 'जाना था जापान, पहुंच गये चीन' की तर्ज पर इंजीनियरिंग पढ़ने में ज्यादातर वक्त गुज़ारती हैं जबकि शौक है पॉलिटिकल, क्रिमिलन नॉन फिक्शन नॉवेल्स पढ़ने का. इनका दावा है कि...
सुशांत कुमार शर्मा जेएनयू से हिंदी साहित्य में स्नातक करने के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल पूरी करके वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उत्तर भारत के तीन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर चुके...
कविता क्या है खेती है, कवि के बेटा-बेटी है, बाप का सूद है, मां की रोटी है मैं तब तक कवितायें पढ़ा करता था जब तक मेरी मुलाकात विद्रोही से नहीं हुई थी; रमाशंकर यादव 'विद्रोही'। उनसे मिलने के बाद...

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