मेरे गुरू जी कहते हैं कि कभी भी सिनेमा की समीक्षा उसके तकनीकी पहलुओं पर नहीं करनी चाहिये. सिनेमा एक आर्ट फॉर्म है, जिसमें प्रभावोत्पादकता होती है. फिल्म रिव्यू साधारण दर्शक के लिये लिखे जाते हैं इसलिये फिल्मों की...
कुँवर नारायण अभी बाक़ी हैं कुछ पल, और प्यार का एक भी पल बहुत होता है... प्यार की अमरता का गान करने वाले कवि कुंवर नारायण साल 2017 के 15 नवंबर को इहलोक को छोड़ गए। कुंवर नारायण नहीं रहे लेकिन उनके शब्द...
प्रकाश के रे वरिष्ठ पत्रकार हैं. भारत मे अंतराष्ट्रीय मसलों के चुनिंदा जानकर लोगों में से एक हैं. विश्व राजनीति के साथ-साथ मीडिया, साहित्य और सिनेमा पर भी आप गहरी समझ रखते हैं. ------------------------------------------------------------------------------------------------- मलयालम साहित्य में मॉडर्निज़्म के सशक्त हस्ताक्षर...
सुशांत कुमार शर्मा जेएनयू से हिंदी साहित्य में स्नातक करने के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल पूरी करके वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। उत्तर भारत के तीन प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर चुके...
वे लोग और हैं जो अब मुहब्बत नही करते. जिनकी आँखों मे अब किसी का इंतज़ार नही है. जिनके होठों पर कोई शायरी नही है. जिनकी डायरी के पन्नो पर अधूरी कवितायें नही है.जिनके गीतों में किसी का ज़िक्र...
समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई कांग्रेस से आई हो जनता से आई झंडा के बदली हो जाई... समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई... यह विशुद्ध भोजपुरी भाषी जिले देवरिया में 1945 को जन्मे गोरख पांडेय का जनगीत है। यह उस समय की आबोहवा...
बस्तर (Bastar) का नाम सुनते ही मन मे ढेरों सवाल उठते हैं और भय और क्रोध की एक मिश्रित सी लहर धमनियों में दौड़ जाती है। हालाँकि इन सारे सवालों में नक्सली समस्या एक ऐसा सवाल था जिसे समझने...
'रेड'(Raid) देखी, अच्‍छी लगी! 'ईमानदार अफसर' और 'भ्रष्‍ट नेता' को लेकर हिंदी सिनेमा ने जो स्‍टीरियोटाईप गढ़ रखा है यह सिनेमा भी उससे पूरी तरह तो नहीं पर बहुत हद तक अलग लगी। हिंदी सिनेमा के स्‍टीरियोटाईप में ईमानदार...
साथियों, मैं इस लेख में जो कुछ लिखूँगा सच लिखूंगा सच के सिवा कुछ नहीं लिखूँगा। मैं सांप्रदायिक नहीं हूँ इसलिए फ़िल्मी फैज़ल की तरह गीता की, क़ुरआन की ,बाइबिल की, गुरु ग्रन्थ की, त्रिपिटक की सबकी कसम खा सकता...
प्रिय! इस वैलेंटाइन तुमसे अलग होना किसी बुरे स्वप्न से कम नहीं है। इतने सालों से तुमने मुझे खुद में समेट कर रखा है। नाम, काम और दाम सब दिया है। मैं हमेशा तुम्हारी आलोचना करता रहा। तुममें कमियां निकालता...

सोशल मीडिया

0FansLike
48FollowersFollow

हमारी पसंद

विज्ञापन

- Advertisement -