कठफोड़वा.कॉम की नई साथी मनुकृति जबलपुर में रहती हैं. ‘जाना था जापान, पहुंच गये चीन’ की तर्ज पर इंजीनियरिंग पढ़ने में ज्यादातर वक्त गुज़ारती हैं जबकि शौक है पॉलिटिकल, क्रिमिलन नॉन फिक्शन नॉवेल्स पढ़ने का. इनका दावा है कि इनके अंदर कुछ रैप्टाइल्स जैसे गुण भी हैं, जैसे घंटों सोना. सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं, हर सोशल प्लेटफॉर्म पर इनका अकाउंट मिल जायेगा. पर पूरे अदब से पेश आइयेगा क्योंकि डसने का हुनर भी ठीक-ठाक विकसित कर रखा है.
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‘द गॉडफादर’ के माइकल कॉरलियोनी यानि अलपचीनो ने अपने जीवन में एक दौर में रगड़ के थियेटर किया. एक्टर तो वह अच्छे बन गये थे पर अभी फिल्मों में काम करने का आत्मविश्वास उनमें कम था. ऐसे ही दौर में उन्हें ऑफर हुई थी ‘द गॉडफादर’. जो विश्व की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही है और बाद में जिससे प्रभावित होकर दुनिया भर में सैकड़ों फिल्में बनीं. इसी फिल्म से जुड़ा एक मजेदार वाकया ये है कि इस फिल्म में अल पचीनो, नये कलाकार होने के कारण और फिल्म के निर्देशक फ्रांसिस फोर्ड कॉपोला, प्रोड्यूसर्स के बजट के दबाव के कारण बेहद तनाव में थे.

मारियो पूजो के बहुचर्चित नॉवेल ‘द गॉडफादर’ पर बन रही यह फिल्म निर्माण के दौरान ही बंद हो सकती है, इस बात का डर पूरी निर्माण टीम को लगा रहता था. पर देखिये आज यह ऐतिहासिक किस्सा हमें सीख दे रहा है कि सच्ची लगन से किया गया हर काम अद्वितीय बनकर सामने आता है. आज यानि 12 दिसंबर, 1974 को रिलीज हुआ ‘द गॉडफादर’ का दूसरा भाग, जिसमें साथ में अल पचीनो और रॉबर्ट डी नीरो स्क्रीन पर थे. वह दो बेहतरीन एक्टर, हॉलीवुड में जिन्होंने कई दशकों तक दर्शकों को रिझाये रखा. खैर गॉडफादर के दूसरे भाग के वक्त तक तो अल पचीनो में काफी विश्वास आ गया था पर पहले भाग के रिलीज होने के बाद जो तहलका और तमाशा हुआ, वो भी कम मायने नहीं रखता.

पहला भाग रिलीज होने के बाद कॉपोला एक निर्देशक के रूप में और अल पचीनो एक एक्टर के रुप में न सिर्फ स्थापित हो गये बल्कि इनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग भी खड़ी हो गई. इसके बाद जब इस फिल्म के लिये अल पचीनो को सहायक अभिनेता का ऑस्कर दिया जाना था तो पचीनो ने वो लेने से इंकार कर दिया. उनका कहना था कि डॉन कॉरलियोनी का किरदार निभाने वाले मर्लिन ब्रैंडो से ज्यादा वक्त वह फिल्म में स्क्रीन पर रहे हैं और वह असल में मुख्य अभिनेता के ऑस्कर के दावेदार हैं. वहीं मुख्य अभिनेता का ऑस्कर पुरस्कार मर्लिन ब्रैंडो को मिलना था. उन्होंने भी पुरस्कार लेने से मना कर दिया. उन्होंने अपनी जगह नेटिव अमेरिकन्स के अधिकार के लिये लड़ रहे एक कार्यकर्ता को भेजा. जिसने मंच पर आकर पुरस्कार लेने से मना कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि फिल्म में नेटिव अमेरिकन्स को सही से प्रदर्शित नहीं किया गया है.

खैर यह तो रही पुरस्कार की बात पर फिल्म की बात करें तो शुरुआत में ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि माइकल (अल पचीनो) ही आगे चलकर इतने बड़े माफिया साम्राज्य का मुखिया बन जाएगा. जह वह अपनी दोस्त को अपनी बहन की शादी में बुलाता है, उसके सवालों के जवाब देता है जो कि माफिया परिवार के बारे में कुछ नहीं जानती. उस की जिज्ञासा को पूरी करने के लिए समझदारी से उसे जवाब देता है. जवाब में वह कभी भी अपने परिवार को गुंडा या माफिया गुट कहकर संबोधित नहीं करता बल्कि एक अन्य साधारण नागरिक के समान बताता है. अपने सौतेले भाई टॉम के बारे में बताते वक्त यह नहीं कहता कि वह गॉडफादर का रणनीतिकार है बल्कि उसे वापस वकील बताता है.

और जब यही माइकल कॉरलियोनी, टोनी मोंटाना बन जाता है

हम माइकल कोरलियोनी को एक सीधे-सादे नागरिक, एक युद्ध से लौटे सिपाही को शहर का सबसे खूंखार और भयावह आदमी बनते देखते हैं. देखते ही नहीं, महसूस करते हैं. हमें उसके लिए बुरा लगता है कि वह अपने परिवार के माफिया धंधे में फंस गया और डर भी लगता है क्योंकि वह अपने गद्दारी करने वालों को भी नहीं बख्शता चाहे वह उसके खुद ही के परिवार का क्यों ना हो. वह अपने जमीर से लड़ता रहता है और इस दलदल से निकलने की कोशिश भी करना चाहता है पर साथ ही साथ अपने परिवार को महफूज भी रखना चाहता है. इस कारण से वो उस धंधे से निकल नहीं पाता.

अल-पचीनो ने माइकल को किरदार के इसी बदलते रूप को अपने अभिनय से दिखा कर चौंका दिया था. हम अभिनेता को एक किरदार के रूप में देखते हैं तो वह हमें वही लगने लगता है जैसे गॉडफादर के बाद पचीनो की छवि भी एक जटिल और परिष्कृत माफिया मुखिया की बन गई थी पर वहीं फिल्म ‘स्कारफेस’ (1983) में ठीक माइकल कॉरलियोनी के उलट एक किरदार निभाकर पर पचीनो ने फिर जनता को चौंका दिया और दिल जीत लिया. इसमें वो गॉडफादर की तरह सोच समझकर बोलने वाला, परिवार की सुरक्षा के लिए अपने जमीर से बार-बार पर लड़ने वाला नहीं बल्कि एक रिफ्यूजी कैंप से उबरकर मियामी में नशीले पदार्थों व्यापार करने वाला एक लफंगा लड़ाकू अहंकारी आदमी बने हैं.

टॉनी मोंटाना ! जो गरीबी से उभरकर और शक्ति हासिल कर लेता है. जो अपने दोस्त की शादी अपनी बहन से होते देख खुश नहीं होता और सी वक्त उसे मार डालता हैं. यह अपने आप में दो विपरीत किरदार हैं जो एक अकेले अभिनेता ने निभाया और अपना नाम सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओंं में शामिल किया.

पचीनो के निभाए यही जीवंत किरदार आज भी सब अपने फिल्म और अभिनय में लाने की कोशिश करते हैं चाहे वह बॉलीवुड हो या यह विश्व भर की कोई भी माफिया मूवी हो. गॉडफादर उन सभी माफिया मूवीज़ के लिए गॉडफादर है, जिसमें अल पचीनो के अभिनय ने जान भरी थी .यह तो बात हो गई पुरानी फिल्मों की अब इनकी नई फिल्म भी आने वाली है जिसमे अल पचीनो और रॉबर्ट डी नीरो दोनों साथ में होंगे. वैसे अभी तक एक डॉक्यूमेंट्री को भी जोड़ लें तो दोनों पांच फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं.