सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कंडोम के विज्ञापनों को दिन के वक्त टेलीकास्ट करने से मना किया गया है. एडवाइजरी में स्मृति ईरानी के नेतृत्व वाले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि कंडोम के विज्ञापन केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही दिखाए जाएं. ताकि केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 में निहित प्रावधानों का सख्त पालन करते हुए ऐसे कंटेट को बच्चों तक पहुंचे जाने से रोका जा सके. वेब पोर्टल इसे संस्कारी फैसला कह रहे हैं.

गौरतलब है कि मई 2016 में पाकिस्तान ने भी कुछ ऐसा ही फैसला लिया था. तब पाक की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने देश के सभी टीवी चैनलों और रेडियो स्टेशनों को नोटिस जारी कर गर्भ निरोधकों और परिवार नियोजन के उत्पादों के विज्ञापन ‘तुरंत प्रभाव से रोकने’ को कहा था.

पीईएमआरए के नोटिस में कहा गया था, ‘आम जनता को डर है कि इन उत्पादों के बारे में बच्चों को जानकारी हो जायेगी. वे इन उत्पादों के प्रयोग और इनकी विशेषताओं को लेकर जिज्ञासु हो सकते हैं.’

किन्जी इंस्टीट्यूट ऑफ रीसर्च इन सेक्स, रीप्रोक्शन एंड जेंडर की तरफ से एक शोध किया गया जिसमें उन्होंने बताया कि किस उम्र के लोग कितनी बार सेक्स करते हैं? इस रिसर्च के मुताबिक 18-29 तक उम्र वाले सबसे ज्यादा शारीरिक संबंध बनाते हैं. सवाल यह है कि क्या भारतीय परिवेश में 18 से 20 साल तक के लोग देर रात तक टीवी देखना प्रिफर करते हैं? भारत में 18 साल के बच्चे इंटरमीडिएट में होते हैं, उस दौरान पढ़ाई के प्रेशर की वजह से क्या वे अधिकतर देर रात तक टीवी देख सकते हैं?

पहले भी भाजपा की ओर से रहा है विरोध

इससे पहले फरवरी, 2016 में राजस्थान के रामगण से भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कंडोम से जुड़ा एक खुलासा कर सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था. उन्होंने पेपर पढ़ते हुए कहा था, ’जेएनयू वो जगह है, जहां 3000 से ज्यादा कंडोम और एंटी प्रेग्नेंसी इंजेक्शन रोज इस्तेमाल होते हैं. रात को 8 बजे के बाद यहाँ के स्टूडेंट नंगे नाचते हैं. हालांकि मैं खुद भारतीय जनसंचार संस्थान का छात्र रहा हूँ और पास होने कि वजह से कई बार जेएनयू आने-जाने और रुकने का मौका मिला है पर मैंने आहूजा की तरह कभी कुछ ऐसा नहीं पाया. ज्ञानदेव सिंह ने इसके अलावा ओर भी कई मज़ेदार बातें बोली थीं लेकिन हमारे चिंतन का विषय कंडोम है. भाजपा विधायक जी ने उस वक्त कंडोम को ऐसे पेश किया था, जैसे यह कोई स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ हो और अब दिन में विज्ञापन पर रोक. इन दो मामलों के बाद आइये पड़ताल करते हैं कि क्या यह सरकार सचमुच कंडोम विरोधी है?

 

पड़ताल में इससे उलट बात सामने आती है

सरकार खुद बनाती है कंडोम- एच.एल.एल. लाइफ केयर नाम की एक कम्पनी सरकार के आर्डर पर कंडोम बनाती है. यह कम्पनी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आती है. विवेक कौल (लेखक और स्तम्भकार) ने ‘द वायर’ में अपने लिखे गये एक लेख ‘Why is the Government manufacturing Condoms?’ में लिखा है कि उन्हें किसी डिजिटल पब्लिकेशन के वरिष्ठ सम्पादक ने बताया था कि

‘सरकार निरोध कंडोम इसलिए बनाती है ताकि उसे उन लोगों तक वितरित किया जाये जिन्हें इसकी आवश्यकता है. इसलिए कंडोम बनाने के लिए ‘एच एल एल लाइफ केयर कम्पनी की आवश्यकता है.’

कंडोम पर मिलती है सब्सिडी- सरकारी कर्मचारी को वेतन के अलावा 108 भत्ते मिलते हैं. इन भत्तों में कंडोम के उपयोग का भत्ता भी होता है.

शगुन के तौर कंडोम दे रही है यूपी सरकार- पिछली 7 जुलाई को उत्तरप्रदेश से एक खबर आई की उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में न्यू मैरिड कपल को शगुन देगी. इलाके की आशा वर्कर्स न्यूली कपल्स को परिवार नियोजन के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए घर-घर जाकर एक-एक किट देंगी. इस किट में गर्भ निरोधक गोलियां और कंडोम भी होगा. किट में एक लेटर भी होगा जिसमे परिवार नियोजन के बारे में जानकारियां भी लिखी होंगी.

नेशनल हेल्थ मिशन के तहत बांटे जा रहे हैं कंडोम- नेशनल हेल्थ मिशन के तहत देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इसमें हर प्रदेश के आशाकार्यकर्ता और स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को यौन रोगों के बारे में बता रहे हैं और मुफ्त कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां वितरित कर रहे हैं. इसी अभियान के चलते हाल ही में जून 2016 को पंजाब में कंडोम के नाम को लेकर विरोध जताया गया था. आशा कार्यकर्ताओं ने इसके नाम को लेकर आपत्ति जताई थी.

कम पड़ने पर बाजार से कंडोम खरीदती है सरकार– यह खबर मार्च 2015 की है. खबर के मुताबिक ‘तीन साल के अंतराल के बाद केंद्र सरकार एक बार फिर बाजार से कंडोम खरीदी शुरू करने जा रही है. देश के कई हिस्‍सों में कंडोम की कमी की शिकायतों’ और यौन रोगों के अलावा जनसंख्‍या पर नियंत्रण के उद्देश्‍य से सरकार यह कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक, पिछली सरकार अपने कार्यकाल में लगातार तीन सालों तक कंडोम के अलावा अन्‍य गर्भ निरोधकों की खरीदी करने में असफल रही थी.

गौरतलब है कि भारत दुनिया में एड्स पीड़ितों के मामले में तीसरा बड़ा देश है. इस देश में कंडोम को ले कर जितनी सहजता रहे उतना ही अच्छा. पर जाहिर है यह नया सरकारी फरमान इससे उलट ही इशारा करता है.

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आधुनिक निर्मल वर्मा, आशुतोष का दिमाग इंसानी विसंगतियों से हमेशा मथा सा रहता है. आशुतोष इतने मानवीय हैं कि दूसरों का दर्द भी उन्हें अपना ही महसूस होता है. कोई भी ये दर्द उनकी लेखनी में महसूस कर सकता है. आशुतोष कानपुर से हैं और पत्रकारिता में अलग मुकाम रखने वाले कानपुर महानगर के महान पत्रकारों का आशीष जरूर इनके सिर पर होगा जो बेहद तार्किक होने के साथ ही आशुतोष की लेखनी को लालित्य और प्रवाह भी मिला हुआ है. तार्किकता के धनी आशुतोष ने बाद में भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई की. इंसानी मनोविज्ञान का बेजोड़ नमूना 'यातना की वसीयत' नामक किताब लिख चुके आशुतोष को संपादक जल्द ढूंढ़ते फिरेंगे. आधुनिक आशुतोष सोशल मीडिया पर भी साहित्य लेखन से गुरेज नहीं करते और हर पल रचना प्रक्रिया में रमे रहते हैं.

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