रोहित वेमुला की मां ने कहा कि ‘रोहित की मौत देश के लिए दलितों के साथ एकजुटता से खड़े होने का संदेश है.’ आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में दलित छात्र रोहित वेमुला की माँ राधिका वेमुला दलितों के खिलाफ अत्याचार को ले कर मीडिया से बात कर रही थीं.

राधिका वेमुला ने कहा कि हाल के दिनों में, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों में दलितों और हाशिए पर खड़े वर्गों के खिलाफ उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं।

उन्होंने कहा हाल ही में गुंटूर के रवि कुमार ने अपने उच्च अधिकारियों से उत्पीड़ित होने के चलते आत्महत्या कर ली थी। तेलंगाना में भी एक दलित महिला को भी जिंदा जला दिया गया था। हाल ही में एक दलित महिला के टीडीपी कार्यकर्ताओं ने कपड़े उतार दिए क्योंकि वे सरकार के अत्याचारों का विरोध कर रही थी।

मीडिया और अन्य स्रोतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में दलितों के खिलाफ उत्पीड़न के दर्ज मामलों में आंध्र प्रदेश 5 वें स्थान पर है।

राधिका वेमुला ने कहा, रोहित वेमुला ने दलितों की समस्याओं को ले कर संघर्ष करते हुए अपना जीवन त्याग दिया। यह सारे देश के लिए एक संदेश की तरह है ताकि दलित समुदाय के साथ सारा देश एकजुटता से खड़ा हो।

उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी में मुख्यमंत्री चन्द्र बाबू नायडू ने एक बयान कहा था “दलित परिवार में कौन जन्म लेना चाहता है?” इससे समझ आता है कि वह दलित समुदाय के प्रति कितना लापरवाह रुख रखते हैं। यह जरूरी है कि भविष्य में इस तरह दलितों के खिलाफ अत्याचारों को दोबारा न दोहराए जायें। इस बातचीत के दौरान रोहित वेमुला के भाई भी वहीं मौजूद थे।

(संपादित: अविनाश द्विवेदी)

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आधुनिक निर्मल वर्मा, आशुतोष का दिमाग इंसानी विसंगतियों से हमेशा मथा सा रहता है. आशुतोष इतने मानवीय हैं कि दूसरों का दर्द भी उन्हें अपना ही महसूस होता है. कोई भी ये दर्द उनकी लेखनी में महसूस कर सकता है. आशुतोष कानपुर से हैं और पत्रकारिता में अलग मुकाम रखने वाले कानपुर महानगर के महान पत्रकारों का आशीष जरूर इनके सिर पर होगा जो बेहद तार्किक होने के साथ ही आशुतोष की लेखनी को लालित्य और प्रवाह भी मिला हुआ है. तार्किकता के धनी आशुतोष ने बाद में भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई की. इंसानी मनोविज्ञान का बेजोड़ नमूना 'यातना की वसीयत' नामक किताब लिख चुके आशुतोष को संपादक जल्द ढूंढ़ते फिरेंगे. आधुनिक आशुतोष सोशल मीडिया पर भी साहित्य लेखन से गुरेज नहीं करते और हर पल रचना प्रक्रिया में रमे रहते हैं.

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