आजकल इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया की तरह प्रिंट की पत्रकारिता भी बेहद जल्दबाजी में की जा रही है. मीडिया जगत में आपाधापी का यह ऐसा दिलचस्प दौर है, जिसमे हिंदी पत्रकारिता के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार भी शामिल हैं.

दैनिक जागरण हिंदी बेल्ट का सबसे ज्यादा चर्चित अखबार है. हम आपको इसी अखबार के 6 जनवरी के राष्ट्रीय संस्करण में हुई दो बड़ी अनदेखियों से रूबरू करा रहे हैं. यह दोनों खबरें पृष्ठ संख्या 11 पर अंतरराष्ट्रीय खबरों के अंतर्गत देखी जा सकती हैं.

1: खबर की हेडलाइन अमेरिका वाली है और बॉडी उत्तर कोरिया चली गई है

दैनिक जागरण के पृष्ठ 11 से खबर का स्क्रीनशॉट

इस खबर की हेड लाइन है ‘एच-1 बी वीजा नियमों में बदलाव का विरोध’. अब इस खबर का इंट्रो पढिये. लिखा गया है कि ‘अमेरिका को लगातार धमकियां दे रहे उत्तर कोरिया की मिसाइलें उसके लिए भी खतरनाक हो सकती हैं. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले वर्ष उत्तर कोरिया ने जिस बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया गया था, वह कुछ किलोमीटर की दूरी तक जा कर उसके ही शहर में जा गिरी थी.’

खबर की बॉडी अलग है, हेडलाइन अलग. इसी हेडलाइन के अंतर्गत हालंकि यह भी बताया गया है कि ‘एच-1 बी वीजा क्या है और हेड लाइन के सन्दर्भ में ही तस्वीरें भी दी गयी है. यह खबर नयी दिल्ली से फाइल की गयी है. बहरहाल अपने इस भागीरथ प्रयास से दैनिक जागरण दो परमाणु हमला-हमला खेल रहे देशों को साथ लाने में कामयाब रहा है. इसे विश्व-शांति की एक मिसाल के रूप में भी देखा जा सकता है और इससे टीवी मीडिया के रोज के युद्ध के ड्रामे की हवा निकलती देखी जा सकती है (मज़ाक समझें).

2: उत्तर कोरिया की खबर सिडनी से फाइल की गयी है 😉

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण का स्क्रीनशॉट

इस खबर की हेडलाइन है- ‘अपने ही शहर पर जा गिरी उत्तर कोरिया की मिसाइल’. अब आप अंदर खबर पढिये. इंट्रो में लिखा गया है कि ‘आस्ट्रेलियाई नौ सेना ने अरब सागर में एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ी है. नौ सेना के अधिकारियों ने शुक्रवार को यहाँ बताया कि गश्त के दौरान एक जहाज से 3.5 टन हशीश पकड़ी गई’. यहाँ भी खबर अलग है और हेडलाइन अलग. मजे की बात यह है कि यह खबर सिडनी से फाइल की गयी है और हेडलाइन उत्तर कोरिया से जुडी खबर की है.

पूरी सम्भावना है कि यह गलती डेस्क से ही हुई होगी. क्योकि भीतर खबर की बॉडी में कोई दोष नहीं है. सामान्य तौर पर समझा जा सकता है कि यह गलतियाँ जल्दबाजी और आज के मीडिया में जारी कॉपी–पेस्ट संस्कृति के चलते हुई हैं. कुछ जानकार इसमें हशीश का हाथ होने का दावा भी कर रहे हैं (मज़ाक समझें).

3: भाजपा का राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति कौन है?

हाल ही में मिडिया विजिल वेबसाइट पर छपी एक खबर के मुताबिक 31 दिसम्बर को दैनिक जागरण के सप्लीमेंट जागरण जोश के अंश में भाजपा के राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे को भाजपा का राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति बताया गया है.

तस्वीर मिडिया विजिल से साभार

लिखा गया है कि – ‘विनय सहस्त्रबुद्धे भाजपा के राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति हैं. वे महाराष्ट्र के राज्यसभा सदस्य भी हैं. विनय सहस्त्रबुद्धे को लोकेश चन्द्र के स्थान पर नियुक्त किया गया है.’

ख़ास बात यह है कि जागरण का जोश सप्लीमेंट उन युवाओं के लिए निकाला जाता है जो प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. जागरण यह दावा भी करता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कामयाबी के लिए वह देश की नंबर वन वेबसाइट है. लगता है खाली पड़े सरकारी पदों की जिम्मेदारी लेने का जागरण का वक्त आ रहा है (मज़ाक समझें).

यह चिंताजनक है क्योकि दैनिक जागरण हिंदी बेल्ट का सबसे चर्चित अखबार है. उसकी तरफ से की जा रही यह गलतियाँ करोड़ों लोगों को प्रभावित करती हैं क्योंकि अखबार ‘देश में सबसे ज्यादा पढे़ जाने’ का खुद दावा करता रहा है. ऐसे में जागरण को अपने कंधों पर लदी भारी जिम्मेदारी को समझना चाहिये.

___________________________________________________________________

यह लेख आप कठफोड़वा.कॉम पर पढ़ रहे थे. आगे भी हमारे लेख और वीडियोज़ पाते रहने के लिये हमें फेसबुक और ट्विटर पर लाइक करें और यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें-

कठफोड़वा फेसबुक

कठफोड़वा ट्विटर

कठफोड़वा यूट्यूब

SHARE
Previous articleकमलेश्वर: जिनकी अदालत में गांधी, नेहरु, जिन्ना सब दोषी थे
Next articleसंघ और वामपंथी संगठन साथ आये, मिलकर भाजपा सरकार से भिड़ने की तैयारी
आधुनिक निर्मल वर्मा, आशुतोष का दिमाग इंसानी विसंगतियों से हमेशा मथा सा रहता है. आशुतोष इतने मानवीय हैं कि दूसरों का दर्द भी उन्हें अपना ही महसूस होता है. कोई भी ये दर्द उनकी लेखनी में महसूस कर सकता है. आशुतोष कानपुर से हैं और पत्रकारिता में अलग मुकाम रखने वाले कानपुर महानगर के महान पत्रकारों का आशीष जरूर इनके सिर पर होगा जो बेहद तार्किक होने के साथ ही आशुतोष की लेखनी को लालित्य और प्रवाह भी मिला हुआ है. तार्किकता के धनी आशुतोष ने बाद में भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई की. इंसानी मनोविज्ञान का बेजोड़ नमूना 'यातना की वसीयत' नामक किताब लिख चुके आशुतोष को संपादक जल्द ढूंढ़ते फिरेंगे. आधुनिक आशुतोष सोशल मीडिया पर भी साहित्य लेखन से गुरेज नहीं करते और हर पल रचना प्रक्रिया में रमे रहते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here