दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा के सामने चलती बस में हस्तमैथुन करने का एक मामला सामने आया है .छात्रा बस में आरोपी के ऐसे करने का विरोध कर रही थी. यात्रियों से मदद की गुहार लगा रही थी ,पर कोई सामने नहीं आया. आख़िरकार छात्रा ने इस घटना का वीडियो बना लिया.पीड़िता का यह भी आरोप है कि बीते 10 फरवरी को 6 घंटे इंतजार के बाद वसंत विहार थाने में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया, लेकिन कोई गिरफ्तार नहीं हुआ है.

प्रिय पाठकों, सबसे पहले आप सभी से और तनिष्का (डीयू की छात्रा का बदला हुआ नाम) से माफी मांगता हूं क्योंकि उसके साथ बस में हुई घटना की जानकारी के बावजूद भी कठफोड़वा अपनी व्यस्तता के चलते इस मुद्दे को उठा नहीं सका. मुख्य धारा की मीडिया ने इस मामले को सनसनीखेज बताया है. हालांकि भारत की अमूमन महिलाएं किसी न किसी तरह की यौन बदसलूकी की शिकार हुई हैं. कहीं मददगार सामने नहीं आते हैं , तो कहीं पीडिता खुद पीछे रह जाती है.एक उन्नत होते समाज के तौर पर यह एक आम घटना नहीं है, इसलिए हमे इस खबर की खबर लेना जरुरी है.

क्यों कोई आदमी किसी महिला के सामने हस्तमैथुन करता है? स्वयं को महिला की अपेक्षा ताकतवर दिखाने के लिए- हालांकि यह यौन मामले ले जुड़ी एक बात है पर ऐसा करने वाले व्यक्ति के अंदर सबसे अधिक खुद को महिला से अधिक ताकतवर (शारीरिक/मानसिक) दिखाने की गलतफहमी काम कर रही होती है.

नारी आंदोलोनो पर काम कर रही जीनिया बंदोपाध्याय स्त्री को संपत्ति के रूप में देखे जाने की प्रवृत्ति के रोल पर युद्धों के बाद पराजितों की स्त्रियों के बलात्कार का उदाहरण देती हैं. वह कहती हैं, चूंकि स्त्रियों को हमेशा आदमी की संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया गया तो उस संपत्ति के अधिकारी के मारे जाने या गुलाम बना लिए जाने के बाद स्त्री के ऊपर विजेता अपना अधिकार मानता था. औरत को संपत्ति माने जाने की इसी प्रवृत्ति के चलते उसे एक यौन तुष्टि की उपयोगिता भाग तक सीमित किया गया.

यही मानसिकता एक आदमी को एक महिला के सामने बल पूर्वक शोषित करने के लिए हस्तमैथुन को प्रेरित करता है क्योंकि यह खुद को बलशाली मानने वाले पुरुष का बलपूर्वक महिला को नीचा दिखाने और शोषित करने का तरीका होता है. पहले बिंदु पर ध्यान दें तो पुरुष का खुद को महिला से सुपीरियर मानने का प्रतीक उसके दिमाग में उसका लिंग होता है. आप समझ रहे होंगे कि वह लिंग महिला के सामने क्यों प्रदर्शित करता है?

अक्सर समाज एक पुरुषवादी मानसिकता से ग्रसित होता है. साथ ही महिलाओं के साथ हुई ऐसी घटनाओं को आम घटना की दृष्टि से देखने का आदी भी. इसीलिए ऐसी किसी घटना के घटने पर महिलाएं अक्सर शांत रहना और उसे झेल जाना ही प्रिफर करती हैं क्योंकि उन्हें किसी प्रकार की सामाजिक सहायता की उम्मीद बहुत कम ही होती है. मसलन तनिष्का (बदला नाम) की घटना को लें तो बस जैसे पब्लिक प्लेस में तनिष्का ने अपने साथी पैसेंजर्स से मदद न मिलने पर ही वीडियो बनाया.

स्त्री की योनि से जुड़ने वाली इज़्ज़त की मानसिकता से इसके साथ ही स्त्री को हमेशा कोमल, सब सह लेने वाली ही प्राणी के रूप में जो रिप्रेज़ेंट किया जाता है. वह भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का एक बड़ा कारण बनता है. क्योंकि लोग अक्सर महिलाओं को पुलिस थाने कचहरी से बचने की सलाह देते हैं.

यह एक समाज विज्ञानी लिहाज से सोचने की बात भी है कि कैसे एक युवक की वासना इतनी अनियंत्रित कैसे हो सकती है ? कई बार समझदारी और सभ्यता के विकास में कुछ ऐसी बुनियादी भूलें हो जाती हैं ,जिनका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. भारत में अभी भी लम्बी उम्र तक स्त्री और पुरुष का शरीर एक –दूसरे के लिए किसी रहस्य से कम नहीं होते . भारत में समाज यौन नियन्त्रण के नाम पर एक ऐसी मरी हुई व्यवस्था का निर्माण कर चूका है जिससे युवक और युवतियां लम्बे समय तक अनजान /अमित्र रह कर एक –दूसरे के शरीर के प्रति कुंठाओं के शिकार हो जाते हैं. इन कुंठाओं को बाद में नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है .चूंकि औरतों को शुरुआत से ही सहनशील होने की ट्रेनिंग दी जाती है इसलिए औरतों से जुड़े ऐसे मामले कम सामने आते हैं. पुरुष खुद की कुंठाओं का शमन समाज की औचियुपूर्णता मान कर कर करता रहता है. रोज नए मामले सामने आते रहते हैं .

अगर कोई व्यक्ति आपके बगल में या सामने हस्तमैथुन या यौन शोषण का प्रयास कर रहा है तो क्या करें. अगर आपके पास किसी पब्लिक प्लेस पर ऐसा होता है तो उसकी तस्वीर या वीडियो निकाल लें ताकि आप उसे सुबूत के तौर पर पेश भी कर सकें. तनिष्का की दिलेरी को सलाम कि उसने ऐसा किया. फिर आप अगर स्वयं सक्षम हों तो खुद नहीं तो पास के लोगों की मदद से उसे पकड़ें और उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत ज़रूर करें.

बस एक पब्लिक प्रॉपर्टी है, उसमें ऐसी घटना क्या दिखाती है? बस में अगर कोई व्यक्ति ऐसी हरकत कर रहा है तो 2 बातें सामने आती हैं. गलतफहमी कि इसका उससे बुरा नतीजा नहीं होगा, उसे समाज पर विश्वास है. वह एक औरत को नीचा दिखाकर दिलेरी का काम कर रहा है.

उसे गलतफहमी है कि महिला उसके ऐसा करने से यौनिक सुख पा रही होगी. ये मिसप्रेसेंटेशन पुरुषवादी मानसिकता के कारण ही है जिसमें औरत की इच्छा और सोच मायने नहीं रखती.

आखिर में बस इतना ही कहना है कि अगर आप आसपास किसी को अपने पास खड़े/बैठे किसी व्यक्ति से असहज होता देखें तो उससे तुरंत बात करें. आपके शब्द उस महिला को पलटवार की हिम्मत दे सकते हैं .
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यह लेख अविनाश द्विवेदी  की कलम से लिखा गया है. इसे आशुतोष तिवारी ने सम्पादित किया है.
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