दैनिक जागरण हिंदी बेल्ट का सबसे बड़ा अख़बार है. आज उसकी एक खबर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. खबर की हेडलाइन है ‘बच्ची से नहीं हुआ था दुष्कर्म’. अखबार ने इस हेडलाइन के बाद यह चिन्ह (!) भी नहीं लगाया है, जो खबरों के व्याकरण में आशंका जाहिर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसका आशय यह है कि दैनिक जागरण को अपनी इस खबर की सत्यता पर पूरा भरोसा है. यह खबर जम्मू से फाइल की गयी है. अब तक इस खबर को लाखों की संख्या में लोग शेयर करते हुए यह कहने लगे हैं कि ‘ कठुआ में रेप की घटना सिर्फ एक कौम/पार्टी  को बदनाम करने की साजिश है’.

आखिर सच क्या है –

हैरानी की बात यह है कि दैनिक जागरण की वेबसाइट पर सुबह तक यह खबर ऑन एयर थी. लेकिन अभी यदि आप गूगल पर kathua rape dainik jagran’ सर्च करेंगे, तो आप को यह गूगल स्टोरी सर्च में मिल जाएगी .

लेकिन जब आप इस लिंक पर क्लिक करेंगे तो आपको या इरर दिखाई देगी या फिर इस खबर की जगह पर सुप्रीम कोर्ट से जुडी हुई एक दूसरी खबर दिखाई देगी.

दैनिक  जागरण ने यह खबर क्यों हटाई है –

यह खबर जम्मू से अवधेश चौहान ने रिपोर्ट किया है. जब बूम लाइव नाम की वेबसाइट ने दैनिक जागरण के डिजिटल हेड कमलेश रघुवंशी से बात की तो उन्होंने स्वीकार किया कि ‘यह स्टोरी अब हटा ली गयी है.’ हटाने की वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि ‘अखबार स्टोरी की डिटेल्स के बारे में और जांच पड़ताल करना चाहता है. जब तक जांच पड़ताल और क्रासचेक न हो जाए , तब तक के लिए यह स्टोरी हटाई गयी है’.

हैरानी की बात यह है कि यदि अखबार को इस खबर के तथ्यों पर किसी तरह की आशंका थी तो उसने आशंका जाहिर करते हुए पत्रकारिता की दुनिया में अक्सर इस्तेमाल किया जाने वाला (!) या चिन्ह भी लगाना उचित क्यों नहीं समझा.

अवधेश चौहान ने 15 अप्रैल की रिपोर्ट पढिये-

15 अप्रैल को दैनिक जागरण की वेबसाइट पर एक खबर है जिसकी हेडलाइन है – कठुआ दुष्कर्म मामला – मिटाने से भी नहीं मिटे सबूत’. इस खबर को अवधेश चौहान ने ही जम्मू से फाइल किया है.खबर के तीसरे पैरा में लिखा गया है –

‘लड़की से सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि के लिए नाबालिग का वेजेनाइल स्वैब और देवस्थान से मिले बालों को दिल्ली की एफएसएल भेजा गया और दोनों के डीएनए टेस्ट को क्रॉस मैच कराया गया तो पता चला कि बाल दुष्कर्म और हत्या की शिकार नाबालिग के ही हैं। डीएनए प्रोफाइल से क्राइम ब्रांच को दुष्कर्म के साक्ष्य भी मिले हैं।’

चार दिन पहले क्राइम ब्रांच की ही रिपोर्ट के मुताबिक अवधेश चौहान के जरिये की गयी खबर में दुष्कर्म का जिक्र है. ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या यह खबर बेहद जल्दबाजी में नहीं की गयी ? क्या तथ्यों की पड़ताल किया जाना जरुरी नहीं था ?

माफ़ी मांगेगा दैनिक जागरण! –

अखबार ने यह खबर वेबसाइट से तो हटा दी है लेकिन प्रिंट अख़बार के जरिये यह भारत के सुदूर गाँवों तक पहुंच चुकी है. यदि दैनिक जागरण यह स्वीकार करता है कि अभी तथ्यों की पड़ताल की जानी बाकी है तो क्या पाठकों को यह सवाल नहीं करना चाहिए कि अधूरी पड़ताल के आधार पर इतनी बड़ी फ्रंट पेज खबर को क्यों छापा गया ? क्या दैनिक जागरण अपने पाठकों से माफ़ी मांगेगा? हम सिर्फ कल के दैनिक जागरण का इंतजार कर सकते हैं.

 

 

 

………………………………………………………………………………………………………
यह लेख आप कठफोड़वा.कॉम पर पढ़ रहे थे. आगे भी हमारे लेख और वीडियोज़ पाते रहने के लिये हमें फेसबुक और ट्विटर पर लाइक करें और यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें-

SHARE
Previous articleक्या डेढ़-डेढ़ सौ चूहे खाकर बिल्लियां हज को जा पायेंगीं?
Next articleअगर किताब पढ़ने का मन नहीं होता तो क्या आपका जीना व्यर्थ है?
आधुनिक निर्मल वर्मा, आशुतोष का दिमाग इंसानी विसंगतियों से हमेशा मथा सा रहता है. आशुतोष इतने मानवीय हैं कि दूसरों का दर्द भी उन्हें अपना ही महसूस होता है. कोई भी ये दर्द उनकी लेखनी में महसूस कर सकता है. आशुतोष कानपुर से हैं और पत्रकारिता में अलग मुकाम रखने वाले कानपुर महानगर के महान पत्रकारों का आशीष जरूर इनके सिर पर होगा जो बेहद तार्किक होने के साथ ही आशुतोष की लेखनी को लालित्य और प्रवाह भी मिला हुआ है. तार्किकता के धनी आशुतोष ने बाद में भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई की. इंसानी मनोविज्ञान का बेजोड़ नमूना 'यातना की वसीयत' नामक किताब लिख चुके आशुतोष को संपादक जल्द ढूंढ़ते फिरेंगे. आधुनिक आशुतोष सोशल मीडिया पर भी साहित्य लेखन से गुरेज नहीं करते और हर पल रचना प्रक्रिया में रमे रहते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here