इस बार भी 30 जनवरी को हम महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मना रहे हैं। यह गांधी जी की 70वीं पुण्यतिथि है। 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने 78 साल के गांधी को गोली मार दी थी। गांधी इस दौरान लेख लिखे जायेंगे, भाषण दिये जायेंगे। अंत में सबका निचोड़ होगा कि गांधी महान थे। वो आज भी प्रासंगिक है। लेकिन बिना लाग-लपेटे मैं ये कहता हूं कि गांधी की प्रासंगिकता बची है कहना एक छल है। ज्यादा सोचने से पहले एक कहानी सुनिए-

अंतिम सांसें गिन रहे एक पिता ने अपने पुत्र से कहा- “बेटा! अगर कभी तुम्हारी हैसियत हो जाए तो मेरे बनाए कच्चे घर को पक्का बना देना।” पुत्र पिता भक्त था। दोनों टाइम उनकी पूजा करते थे। मेहनत, काबिलियत और सुअवसर के कारण उनकी हैसियत भी हो गई। शहर में घर ले लिया। गांव और शहर के घरों में पिता की बड़ी तस्वीर लगा दी। घर के गेट पर पिता की मूर्ति भी स्थापित हो गई। पुत्र अपने पिता की यश-गाथा, उनकी मेहनत और प्रासंगिकता की चर्चा अक्सर करता रहता। उन्होंने अपने पिता की स्मृति और प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए जो कुछ भी संभव था किया, पर वह ना किया जो पिता का सपना था। जो मरते वक्त पिता कह कर गए थे कि बेटा मेरे बनाए कच्चे घर को पक्का करवा देना। पिता के सपने को अधूरा छूटते देख, अपने अंतिम दिनों में पुत्र ने अपने पुत्र यानि कि पिता के पौत्र से कहा- “बेटा ! दादा जी की इच्छा थी कि उनका बनाया हुआ घर पक्का हो जाए, हम तो कर नहीं पाए तुम करवा देना।” इतना कहकर वे भी गुजर गए।

पौत्र ने और भी शानदार हैसियत, पद-प्रतिष्ठा हासिल कर ली। देश में ही नहीं विदेश में भी घर-बार हो गया। पौत्र ने अपने पूज्य पिताजी के परम पूज्य पिताजी की पूजा-अर्चना और प्रासंगिकता को जिलाए-जगाए-बनाए रखने की कोशिश को विराम नहीं लगने दिया। लेकिन गांव का पैतृक घर दादा जी के समय जैसा था (कच्चा), वैसा ही पड़ा रहा। पौत्र का भी विचार था कि दादा जी की पहचान उसी घर से थी तो घर को उसी खराब हालत में रखना जरुरी था।

इस कहानी से मैं जो कहना चाहता हूं शायद आप समझ गए होंगे फिर भी थोड़ा साफ किये देता हूं। गांधी महान थे। पूरी दुनिया में गांधी का नाम है। गांधी की आज भी प्रासंगिकता है। गांधी के विचार दुनिया को शांति देने वाले थे। देश के लिए अच्छे थे। इसमें कोई दोराय नहीं है। कोई विवाद नहीं है। ये सब था। लेकिन पिछले 70 सालों से हम इसी को दोहराये जा रहे हैं। क्या आपको लगता है कि गांधी का एक भी विचार, एक भी आदर्श आज इस देश में कोई मानता है? उसका पालन करता है? छोटे से गांव का प्रधान भी गांधी के विचारों को लेकर कुछ करता होगा? या फिर पिछली हुकूमतें मानती थीं? दिनोंदिन देश में हिंसा बढ़ रही है। लोगों में कट्टरता बढ़ रही है। छोटी-छोटी बातों में लोग समूह में सड़क पर निकलकर लोगों को मार देते हैं? ये गांधी का देश है? गांधी के मुखौटे के पीछे कब तक ये देश छिपा रहेगा? सफाई अभियान में गांधी का चश्मा। 2 अक्टूबर को स्वच्छता दिवस बनाना। विदेशों में गांधी के नाम की माला जपना। ये सब फ़र्ज़ी है। ये इसीलिए हो रहा है और होता रहा है जिससे आप गांधी-गांधी करते रहें। उनकी बातों, उनके विचारों की तरफ रुख ही नहीं करें। बिल्कुल उस पुत्र और पौत्र की तरह जिन्होंने पिताजी-पिताजी करते-करते पहले शहर में फिर विदेशों में घर बना लिया। अमीर हो गए, लेकिन पिताजी का कच्चा मकान कच्चा ही बना रहा।

वास्तव में गांधी जी की प्रासंगिकता तभी होगी जब उनके विचारों को प्रासंगिक किया जाए। धरातल पर उन्हें लागू करवाने के लिए प्रयास किए जाएं। लंदन के पार्लियामेंट स्कवॉयर में दुनिया के 11 महान लोगों की मूर्तियां लगीं हैं। इनमें से अकेले गांधी जी ऐसे हैं जो किसी सत्ता के पद पर नहीं रहे। एक मूर्ति विंस्टन चर्चिल की भी लगी है, जिन्होंने गांधी को नंगा फ़कीर कहा था। दक्षिण अफ्रीका में गांधी के राजनीतिक विरोधी रहे और बाद में वहां के गृह मंत्री बने स्मट्स ने गांधी के भारत लौटते वक्त कहा था ‘संत हमारे यहां से चले गए, अब वापस नहीं आएंगे। गांधी के काम करने का तरीका ईसाईयों को ईसा मसीह की याद दिलाता है।’ अमेरिकन पत्रकार और लेखक लुई फिशर (LOUIS FISCHER) ने 1950 में ‘ए लाइफ ऑफ़ महात्मा गांधी’ किताब लिखी जिसपर 1982 में महान फिल्म ‘गांधी’ बनी। लुई ने लिखा- ‘आधुनिक इतिहास के नामी व्यक्ति चर्चिल, रुजबेल्ट, जॉर्ज, स्टालिन, हिटलर, लिंकन आदि के हाथों में राज्यों की सत्ता थी। लोगों के मानस पर प्रभाव डालने में गांधी जी के मुकाबले का एक मात्र गैरसरकारी व्यक्ति कार्ल मार्क्स को समझा जा सकता है।’ नोबेल पुरस्कार से सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने गांधी की जीवनी लिखी। उन्होंने एक जगह लिखा- ‘उन्हें देखकर मुझे सबसे अधिक सुकरात की याद आई। वो बिना किसी दिखावे के ऐसी शक्तिशाली बातें कह जाते हैं, जो दुनिया का स्वरुप बदल सकती हैं।’

इन सबके कथन और गांधी को लेकर इनके विचार इसलिए लिखें हैं ताकि आप कुछ गौर फ़रमाएं। गांधी महान। गांधी महान। सालों से रटते आ रहे हैं, उसे रटना बंद कीजिए, और हो सके तो धार्मिक कट्टरता, जातिगत भेदभाव को लेकर गांधी के विचारों को आत्मसात कीजिए। तभी सही मायनें में गांधी की प्रासंगिकता होगी, नहीं तो 70 की जगह 170 साल हो जाएंगी और हमारा हिंदुस्तान दो की जगह कई भागों में टूट कर बिखर जाएगा। हिंदुस्तान में हज़ारो देश बसते हैं किसी महान व्यक्ति ने कहा था।
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यह लेख हमारे लिए चमन मिश्रा ने लिखा है. वर्तमान में चमन एक पत्रकार हैं. लेखन में रूचि है. ‘तान्या’ नाम की किताब लिख चुके हैं.

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