अमेरिकन अख़बारों में एक बेहतरीन चलन है. वह उम्मीदवार द्वारा चुनाव से पहले किये जाने वाले दावों/वादों की कठोर समीक्षा करते हैं. कई बार अखबार वादाखिलाफी या मुद्दों पर स्टैंड में बदलाव को ले कर लम्बे समय तक अभियान चलाते हैं. अपने देश में भी ऐसा पत्रकारीय काम यदा-कदा होता रहा है. राजनीतिक वादाखिलाफी को यहाँ नारेबाजी और जुमलों की राजनीति का हिस्सा मान लिया गया है हालांकि विमर्श की दुनिया में यह बात चल रही है कि एक नेता को कैसे अपनी कही गयी बात के प्रति जवाबदेह बनाया जा सकता है? इसका एक हल यह भी हो सकता है कि हम लगातार नेताओं के मौजूदा रूख की समीक्षा करते रहें.



मोदी सरकार अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग वादे करके बहुमत में आई थी. नरेंद्र मोदी को केंद्र में रख कर चलाए गये भाजपा के लोकसभा चुनावी अभियान की सबसे ख़ास बात यह थी कि प्रधानमन्त्री ने अपनी मुख्यमंत्री की छवि से बिलकुल अलग हर मसले को संबोधित किया था. तो हम यहां ऐसे ही दस मसलों पर किये वादों के रियलिटी चेक का प्रयास कर रहे हैं. आइये जानते हैं कि भाजपा की इन दस मसलों के प्रति तब क्या राय थी और अब क्या है?

1- मनरेगा

मनरेगा योजना की मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही आलोचना की थी. खबरें तो यहां तक आई थीं कि सरकार इस योजना को समाप्त करने जा रही है. साल 2015 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “हम विरासत में मिली पुरानी समस्याओं के समाधान की कोशिश कर रहे हैं. मेरी राजनीतिक सूझबूझ कहती है, मनरेगा कभी बंद मत करो. मैं ऐसी गलती कभी नहीं कर सकता क्योंकि मनरेगा आपकी विफलताओं का जीता-जागता स्मारक है. आज़ादी के 60 साल बाद आपको लोगों को गड्ढे खोदने के लिए भेजना पड़ा. यह आपकी विफलताओं का स्मारक है और मैं गाजे-बाजे के साथ इस स्मारक का ढोल पीटता रहूंगा. दुनिया को बताऊंगा, ये गड्ढे जो तुम खोद रहे हो, ये 60 सालों के पापों का परिणाम हैं.”

यू टर्न – 1 अगस्त 2017 को राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने कहा कि “कठिनाई के समय में होने वाले पलायन को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और मनरेगा से इसमें मदद मिली है.” ग्रामीण राज्य विकास मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा, “स्वतंत्र आकलनकर्ताओं के जरिए मंत्रालय द्वारा कराए गये अध्ययन में पाया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के परिणामस्वरूप विशेष मौसम में होने वाले पलायन में कमी आई है. अन्य अध्ययनों में भी दर्शाया गया है कि घर के नजदीक काम देने और कार्यस्थल पर उचित माहौल उपलब्ध कराने से पलायन कम करने में मनरेगा का प्रत्यक्ष और सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.”

यही नहीं मनरेगा योजना को साल 2017-18 के बजट में 48,000 करोड़ रुपये के कोष का आवंटन किया गया. यानी सरकार ने मनरेगा के लिए आवंटन 11 हजार करोड़ रुपए का इजाफा करते हुए इसे 48 हजार करोड़ रुपये कर दिया है. पिछले बजट में मोदी सरकार ने मनरेगा का कोष आवंटन 36,997 करोड़ रुपये दिया था. जो कि इससे पहले 33,000 करोड़ रुपए था.

2- जीएसटी

शुरुआती पक्ष- कांग्रेस अपने शासनकाल में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) लागू करना चाहती थी, भाजपा ने संसद और उसके बाहर इसका जमकर विरोध किया. यहां तक कि भाजपानीत सभी राज्य सरकारों इसे अपने यहां लागू करने से साफ मना कर दिया. जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वो कुछ मुद्दों को लेकर GST का विरोध कर रहे थे. उन्होंने निम्न बातें कही थीं-

1- ”GST के संबंध में गुजरात और भारतीय जनता पार्टी का रुख़ बहुत साफ है. आपका जीएसटी का सपना तब तक साकार नहीं हो सकता जब तक आप पूरे देश में टैक्स पेयर के साथ आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर का नेटवर्क नहीं बनाते. ये असंभव है. क्योंकि जीएसटी की संरचना ही ऐसी है कि हम इसे लागू नहीं कर सकते.”

2- “GST का सवाल है तो गुजरात और बीजेपी का रवैया शुरू से ही साफ है. जीएसटी कभी सफल नहीं हो सकता.”

3- “जीएसटी को लेकर जब प्रणब मुखर्जी वित्तमंत्री थे तो मैंने पूछा था, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के बिना ये संभव हो सकता है? मुखर्जी का जवाब नहीं था. अगर आपके पास इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी नहीं है तभी आप इसे लागू नहीं कर सकते हैं. इस योजना को लागू करने के लिए हर जगह 100 फीसदी बिजली सप्लाई ज़रूरी है. इसके बिना ये संभव नहीं है.”

यू टर्न- एक जुलाई 2017. मोदी सरकार ने भारत में GST (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) व्यवस्था लागू कर दी. केंद्र सरकार ने आधी रात को संसद का विशेष सत्र बुलाकर GST को लागू किया. उस वक्त प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने कहा – ”125 करोड़ भारतीय इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी हैं. देश एक नई व्यवस्था की ओर चल पड़ा है. 2022 में भारत अपनी आज़ादी के 75 साल पूरे करेगा और जीएसटी हमारे लिए मील का पत्थर साबित होगा. जीएसटी केवल आर्थिक सुधार की बात नहीं है, ये आर्थिक सुधारों से आगे बढ़ कर सामाजिक सुधार की बात करता है. इसे भले ही ‘गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स’ कहा जा रहा है लेकिन असल में ये ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ है.”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छोटे और मझौले व्यापारियों के पास ज़रूरी आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा नहीं है. इसके अलावा ज़ाहिर है कि पूरे भारत में 100 फीसदी बिजली की सप्लाई का सपना भी पूरा नहीं हुआ है.

3- आधार कार्ड





शुरूआती पक्ष- जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने आधार कार्ड के लिये तत्कालीन यूपीए सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि ‘अगर वो लोग इसी तरह से अंधाधुंध आधार बांटते रहेंगे तो हमारे गुजरात में आतंकियों के घुसने का खतरा बढ़ जाएगा. आज कांग्रेस वाले जिस आधार कार्ड को लेकर इतना नाच रहे हैं उसे देख कर लगता है कि देश के लोगों को पता नहीं कौन सी जड़ीबूटी बांट रहे हैं. ये आधार कार्ड से लाभ किसको मिलेगा? आधार कार्ड से क्या बाहरी लोग हमारे देश के नागरिक नहीं बन जाएंगे? हमारा गुजरात पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है. अगर इसी तरह केंद्र सरकार सबको आधार कार्ड बांटती रहेगी तो हमारे यहां घुसपैठ का खतरा बढ़ जाएगा. ‘

यू टर्न- मोदी सरकार ने न सिर्फ आधार कार्ड को जारी रखा बल्कि नोट बंदी के बाद से लगभग हर जरुरी सेवाओं में आधार अनिवार्य कर दिया है. यहाँ तक की सरकार राशन (PDS) के लिए भी आधार जरुरी हो गया है. इसके अलावा सरकार के नए आदेश में आईटी रिटर्न फ़ाइल करने के लिए भी आधार अनिवार्य कर दिया गया है. जबकि इन अनिवार्यताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को फटकार तक लगाई है.

4- एफडीआई

2012 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता अरुण जेटली के कुछ पुराने ट्वीट्स आजकल चर्चा में आ गये हैं दरअसल इन ट्वीट में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी ने एफडीआई का विरोध किया था. उन्होंने लिखा था, ‘कांग्रेस देश को विदेशियों को दे रही है. ज्यादातर पार्टियों ने एफडीआई का विरोध किया लेकिन सीबीआई की तलवार के डर से कुछ पार्टियों ने वोट नहीं किया और कांग्रेस पिछले दरवाजे से जीत गई!’ मार्च 2013 में अरुण जेटली ने कहा था कि ‘वह अपनी आखिरी सांस तक एफडीआई का विरोध करेंगे. इसी तरह मोदी ने ट्वीट किया था कि कांग्रेस देश को विदेशियों के हाथों में दे रही हैं.

यू टर्न – हाल ही में एक अहम फैसले में केंद्र की बीजेपी सरकार ने अपने परंपरागत स्टैंड से यू टर्न लेते हुए एकल ब्रांड खुदरा कारोबार (SBRT) और निर्माण क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा सरकार ने एयर इंडिया में भी 49 फीसदी एफडीआई की मंजूरी देकर इसके निजिकरण का रास्ता खोल दिया. केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों और पोर्टफोलियो निवेशकों को पॉवर एक्सचेंज में प्राथमिक बाजार के माध्यम से मौका दिया जाने और और एफडीआई नीति में ‘मेडिकल उपकरणों’ की परिभाषा में बदलाव करने का भी फैसला लिया है. ये सभी निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए.

5- धारा- 370

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में यह वादा किया था कि सत्ता में आने पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाया जाएगा. उन्होंने खुद कहा था कि इस पर सभी पक्षों से बात की जायेगी और वह इसे हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

यू टर्न- मोदी सरकार जब सत्ता में आई. और जम्मू कश्मीर चुनाव के बाद जब पीडीपी के साथ सरकार बनाने की बात चली तब सरकार ने कहा कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 नहीं हटाई जाएगी. दिलचस्प यह है कि राज्य के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने विजन डॉक्यूमेंट में धारा- 370 का जिक्र तक नहीं किया.




6- रेलवे का किराया

सात मार्च 2012 को नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट किया था और कहा कि संसद सत्र से ठीक पहले रेल किराया बढ़ाना अनुचित है. उन्होंने इस मसले पर प्रधानमन्त्री को चिट्ठी भी लिखी थी. उस समय कांग्रेस द्वारा 8 साल के बाद किराए में मामूली बढोत्तरी हुई थी. भाजपा ने इस फैसले का जम कर विरोध किया था. नरेंद्र मोदी ने तब आरोप लगाया था कि सरकार ने संसद को अनदेखा कर रेल किराया बढ़ाया है.

यू टर्न – मोदी सरकार ने यू टर्न लेते हुए रेल बजट से पहले ही रेल किराए में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया. सिर्फ इतना ही नहीं प्लेटफॉर्म टिकेट का दाम बधा कर पहले से दुगुना कर दिया गया.

7- ब्लैकमनी

शुरूआती पक्ष- लोकसभा चुनाव के दौरान शायद ही कोई ऐसी चुनावी रैली हो जिसमें नरेंद्र मोदी ने कालेधन के मुद्दे पर कांग्रेस और यूपीए सरकार को न घेरा हो. उन्होंने देश की जनता से वादा किया था कि वो सौ दिनों के भीतर विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाएंगे. लोकसभा चुनावों प्रचार में इस संबंध में जमकर प्रचार भी किया गया था.

यू टर्न- बाद में तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है कि हमने कभी नहीं कहा कि काला धन सौ दिन के भीतर वापस लाएंगे. इसके लिए उन्होंने भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का भी हवाला दिया. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी काला धन वापसी को लेकर कोई समय सीमा-तय करने पर मजबूरी जताई है. सरकार इसके लिए एक बिल ले कर जरुर आई है पर विदेश से कितना काला धन आया है, इसका कुछ पता नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई के दौरान राम जेठमलानी ने तो यहां तक कह दिया कि केंद्र सरकार देश के साथ धोखा कर रही है. काले धन के मामले में फंसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मंशा सरकार में नहीं दिख रही है क्योंकि उनमें से बहुत लोग ताकतवर हैं और सत्ता के करीब भी. इस सरकार ने भी उन्हीं अधिकारियों को उस पद पर बनाए रखा जो पिछली सरकार में काला धन लाने में रोड़ा थे.’

8- भारत-बांग्लादेश भूमि हस्तांतरण समझौता (LBA)

शुरूआती पक्ष- भारत-बांग्लादेश के बीच सीमा की तस्वीर बदलने वाले 41 साल पुराने जिस एलबीए संविधान संशोधन को बीजेपी ऐतिहासिक करार दे रही है उसे जब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ मनमोहन सिंह अंतिम रूप दे रहे थे तो बीजेपी ने ही इसमें अड़ंगा डाला था.



यू टर्न – सत्ता में आने के बाद यह विधेयक भाजपा पास करा चुकी है. इतना ही नहीं इस संविधान संशोधन विधेयक के समर्थन और सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्षी दलों का आभार जताया. मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास जाकर उनका शुक्रिया अदा किया जबकि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह की इस पहल का बीजेपी ने विरोध किया था.

9- राजनीती में अपराधीकरण

नरेंद्र मोदी ने 22 अप्रैल, 2014 को एक चुनावी रैली के दौरान संसद को असामाजिक तत्वों से मुक्ति दिलाने का वादा किया था. उन्होंने कहा था कि अगर वह पीएम बनते हैं तो उनका पहला काम नये सांसदों के खिलाफ चल रहे केसों की जांच के लिए एक पैनल गठित करना होगा, उसमे जो दोषी होंगे उन्हें जेल भेजा जायेगा.

यू टर्न – मोदी सरकार जब सत्ता में आई तो उसकी मंत्रीपरिषद में 21 ऐसे चेहरे थे जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे. अभी भी भाजपा के कई सांसदों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं. पीएम ने न ही कोई कमेटी बनाई है और न ही पार्टी इनके खिलाफ अंदरूनी जांच कर रही है.

10- हैंडरसन ब्रुक्स रिपोर्ट पर यू टर्न

केंद्र सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस की सरकार के समय भारत-चीन लड़ाई से जुड़ी गोपनीय हैंडरसन ब्रुक्स रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की थी. उन्होंने तब अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा था कि क्या आर्काइव में रखे रिकॉर्ड्स अनंतकाल के लिए जनता की नजरों से दूर रखे जाएंगे? इन दस्तावेज को अनिश्चितकाल के लिए ‘टॉप सीक्रेट’ बनाए रखना जनहित में नहीं होगा.

यू टर्न – अरुण जेटली ने सरकार बनने के बाद अपना वह ब्लॉग ही डिलीट कर दिया जिसमें तीन महीने पहले उन्होंने हैंडरसन रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का समर्थन किया था. अरुण जेटली का यह ब्लॉग उनकी साइट arunjaitley.com पर उपलब्ध था, लेकिन अब यह ब्लॉग वहां नहीं दिख रहा है. अरुण जेटली ने इस मसले पर कहा है कि सरकार इस टॉप सीक्रिट रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर सकती क्योंकि यह देशहित में नहीं होगा.

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आधुनिक निर्मल वर्मा, आशुतोष का दिमाग इंसानी विसंगतियों से हमेशा मथा सा रहता है. आशुतोष इतने मानवीय हैं कि दूसरों का दर्द भी उन्हें अपना ही महसूस होता है. कोई भी ये दर्द उनकी लेखनी में महसूस कर सकता है. आशुतोष कानपुर से हैं और पत्रकारिता में अलग मुकाम रखने वाले कानपुर महानगर के महान पत्रकारों का आशीष जरूर इनके सिर पर होगा जो बेहद तार्किक होने के साथ ही आशुतोष की लेखनी को लालित्य और प्रवाह भी मिला हुआ है. तार्किकता के धनी आशुतोष ने बाद में भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई की. इंसानी मनोविज्ञान का बेजोड़ नमूना 'यातना की वसीयत' नामक किताब लिख चुके आशुतोष को संपादक जल्द ढूंढ़ते फिरेंगे. आधुनिक आशुतोष सोशल मीडिया पर भी साहित्य लेखन से गुरेज नहीं करते और हर पल रचना प्रक्रिया में रमे रहते हैं.

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