“अगर मुझे किसी पागल आदमी की गोली से भी मरना हो तो मुझे मुस्कराते हुए मरना चाहिये। मेरे दिलो-जुबान पर सिर्फ़ भगवान का ही नाम होना चाहिये। और अगर ऐसा कुछ होता है तो तुम लोगों को आँसू का एक कतरा भी नहीं बहाना।”

– महात्मा गाँधी, 28 जनवरी 1948

गांधी की मौत आधुनिक भारत की सबसे दुःखद घटना थी जिसने भारत को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को हिला के रख दिया था। भारतीय लोगों के जीवन से रोशनी चली गयी थी। विश्व भर के बुद्धिजीवी और राजनेता सत्य और अहिंसा के विचार पर हिंसा का ग्रहण देखकर विचलित हो गए थे। ऐसा जान पड़ता था मानो दुनिया को मानवता के लिए बेहतर बनाने की उम्मीद मर रही हो लेकिन जब दुनिया भर से गांधी के लिए श्रद्धांजलि और शोक संदेश आये तो पता चला कि गांधी ने अपनी क़ुरबानी देकर इंसानियत को जगा दिया है। अधिकतर शोक सन्देश विलाप या प्रलाप न होकर ओजस्वी आवाह्न थे जिसमे गांधी के सपनों की अनुगूँज थी। गांधी जा चुके थे लेकिन उनके विचार नक्षत्र बनकर मनुष्यता के आकाश में छा गए। देखिए महात्मा की अंतिम यात्रा और विश्व की प्रार्थना…

जवाहर लाल नेहरू

“हमारे जीवन से रोशनी चली गई और हर जगह अंधकार है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं आपसे क्या कहूँ और कैसे कहूं। हमारे प्रिय नेता, बापू, हमारे राष्ट्रपिता, अब नहीं रहे। शायद यह कहते हुए मैं गलत भी हूं। हम उन्हें फिर कभी नहीं देख पायेंगे जैसा हम सब अब तक उन्हें देखते आये हैं। हम सलाह और सांत्वना के लिए उनके पास नहीं जा पायेंगे। यह मेरे लिए और लाखों देशवासियों के ह्रदय पर एक भयानक आघात है।  फ़िलहाल कुछ भी इस दर्द को कम नहीं कर सकता।
एक पागल आदमी ने उनकी हत्या कर दी। उसे पागल ही कहा जा सकता है जिसने यह किया। और अभी भी पिछले कुछ वर्षों और महीनों में इस देश में पर्याप्त जहर फैल गया है जिसने लोगों के दिमाग पर बुरा प्रभाव डाला है।  हमे इस जहर का सामना करना पड़ेगा। हमें इसे जड़ से उखाड़ फेंकना है। और हमे उन सभी खतरों का सामना करना होगा जो हमे घेरे हुए हैं। और हाँ एक बात याद रहे उनका प्रतिरोध हम पागलपन और बुराई के साथ नहीं करेंगे बल्कि उस तरह करेंगें जैसा हमारे प्रिय शिक्षक ने हमे सिखाया है।”

सरदार वल्लभ भाई पटेल

“उनका नश्वर शरीर भले ही कल 4 बजे राख ने बदल गया लेकिन गांधीजी की अविनाशी शिक्षाएं हमेशा हमारे साथ रहेंगी। मुझे यह भी लगता है कि गांधीजी की अमर आत्मा अभी भी हमारे आसपास है और भविष्य में भी राष्ट्र की नियति को देखती रहेगी। जिस पागल आदमी ने उन्हें मार डाला वह गलत था अगर उसने यह सोचा था कि वह उनके महान मिशन को नष्ट कर सकता है। शायद भगवान उनकी हत्या को निमित्त बनाकर ही गांधी जी के ही लक्ष्यों को पूरा और विकसित करना चाहता था।
मुझे यकीन है कि गांधीजी का सर्वोच्च बलिदान हमारे देशवासियों के विवेक को जगाएगा और हर भारतीय को दिल से सोचने पर मजबूर करेगा। उनमें उच्च प्रतिक्रिया पैदा करेगा। मैं आशा करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि गांधी जी के मिशन को पूरा करने के का दायित्व हमे सौंपा गया है। इस गंभीर क्षण में, हममें से कोई भी अपने दिल को खो नहीं सकता। आइए हम सभी एकजुट हों और बहादुरी से राष्ट्रीय समस्यायों का सामना करें जो हमारे सामने आ खड़ी हुई हैं। आइए हम सभी गांधी जी की शिक्षाओं और आदर्शों के प्रति एक बार फिर से पूर्ण निष्ठा के साथ शपथ लें।”

श्यामा प्रसाद मुखर्जी

“जिस रोशनी ने हमारी मातृभूमि को प्रकाशित किया और वास्तव में अंधेरे और दुःख के बीच की फंसी दुनिया को बाहर निकाला, अचानक गायब हो गयी है। महात्मा गांधी का निधन भारत की आत्मा पर लगा सबसे बड़ा आघात है।  वह जिन्होंने भारत को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बना दिया, जो सबके दोस्त थे और उनका कोई दुश्मन नहीं था, जिनका आदर और सम्म्मान लाखों लोग करते थे, अंततः एक हत्यारे के हाथों मारा गया जो उसके अपने समुदाय और देश का था, यह एक गहरी शर्म की बात है और यही त्रासदी है। वह उन लोगों में से हैं जिनका प्रभाव कभी कम नहीं होता बल्कि समय बीतने के साथ और अधिक से अधिक गहरा होता जाता है।
हत्यारे की गोली ने मात्र उनके नश्वर शरीर को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता और भारत के ह्रदय को भी छेड़ दिया है। अब यह देश और मानवता तभी जीवित रह सकते हैं जब तक लोग इस तरह के हिंसक तरीकों को समाप्त करने के लिए सशक्त रूप से निर्णय नहीं ले लेते हैं।”

सर्वपल्ली राधाकृष्णन

“गांधी जी पर इस घातक हमले से मैं सदमे में हूँ। एक अविश्वसनीय, अकल्पनीय घटना घट चुकी है। हमारे युग के इस सबसे निश्छल, सबसे बड़े उद्धारक, सबसे प्रेरक व्यक्ति का एक पागल आदमी के गुस्से का शिकार होना यह दिखता है कि हम अभी भी नहीं बदले हैं। हम अब भी उसी स्थिति में हैं जिसमे सुकरात को ज़हर दिया गया और ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया। महात्मा गांधी जो कि हमारे विलक्षण अतीत के अकेले प्रतीक थे, अब नहीं रहे। हमने उनके शरीर को तो मार दिया है, लेकिन प्रेम और सत्य की जिस दिव्यज्योति का वे प्रतिनिधित्व करते थे, उसे कभी बुझाया नहीं जा सकता।
ये दुनिया संतों के लिए कब सुरक्षित होगी? सभी महान साम्राज्यों और समस्त दुनिया को यह सीखना है कि अगर हम हिंसा, क्रूरता और अराजकता की खाई में गिरने से बचना चाहते हैं तो हमे वही रास्ता चुनना होगा जिसके लिए महात्मा गांधी जिए और मरे।”

जय प्रकाश नारायण

“यह बोलने का समय नहीं है क्योंकि यह शोक का अवसर है। आओ मिलकर आँसू बहायें। देश को आँसू बहाने दो और उन्हीं आँसुओं से विश्व में अब तक हुए सबसे महानतम आदमी के खून के धब्बों को धोने दो जो कि इस देश की आत्मा पर लग गए हैं। हमे महात्मा गांधी के दिखाए पथ पर चलना होगा। वे एक विशेष मिशन के साथ दिल्ली आये थे, करो या मरो के मूलमंत्र के साथ। उन्होंने बहुत कुछ किया और आखिरकार उन्होंने अपने प्राण उसके लिए कुर्बान कर दिए जो कुछ करना चाहते थे। आइये हम सब अब उस पवित्र कार्य पूरा करें जो उनके पीछे अधूरा छूट गया है।”

जार्ज बर्नार्ड शा

“गांधी जी कि हत्या यह दिखाती है कि बहुत अच्छा होना कितना खतरनाक हो सकता है।”

अल्बर्ट आइंस्टीन

“मानव जाति के बेहतर भविष्य के लिए चिंतित सभी लोगों को महात्मा गांधी की मृत्यु ने गहरे दुःख में ढ़केल दिया है। वह अपने सिद्धांतों के ही शिकार हो गए, अहिंसा के सिद्धांत के शिकार। वह मरे क्योंकि एक बेचैन और विद्रोह के बीच जूझते देश में उन्होंने सशस्त्र सुरक्षा से इनकार कर दिया। यह उनका दृढ़ विश्वास था कि बल का प्रयोग अपने आप में एक बुराई है, इसलिए उन लोगों को इससे इंकार करना  ही चाहिए जो अपने विश्वास के लिए सर्वोच्च न्याय का का प्रयास कर रहे हैं। अपने दिल और मन में अपनी आस्था के साथ, उन्होंने एक महान राष्ट्र को उनकी मुक्ति की मंजिल तक पहुँचाया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि जनता को अपने पक्ष में मात्र राजनीतिक तिकड़मबाज़ी और चालकों के चतुराई से ही नहीं किया जा सकता है बल्कि जीवन के नैतिक रूप के बेहतर आचरण के ठोस उदाहरण से भी अपने पक्ष में एक बड़ा जनसमूह खड़ा किया जा सकता है। आने वाली पीढ़ियों को यकीन ही नहीं होगा कि हाड़-माँस का ये व्यक्ति कभी पृथ्वी पर चला भी होगा।”

मोहम्मद अली जिन्नाह

“दुनिया भर से आयी हुई श्रद्धांजलियों के साथ मैं भी महात्मा गांधी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करता हूँ।  वे उसी काम करते हुए मरे जिसमें उनका अटल विश्वास था। हम चाहे जितना भी विलाप करें या हत्यारे की निंदा करें, लेकिन उनकी दुखद मौत दरअसल एक महान मौत थी क्योंकि वह अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए मारे गए।”

पर्ल एस. बक 

“वह सही थे, उन्हें पता था कि वे सही थे, हम सब जानते थे कि वे सही थे। जिस आदमी ने उनकी हत्या की, वह भी जानता था कि वे सही थे। जब तक लोग हिंसा करते रहेंगे  तब तक वे साबित करते रहेंगे कि गांधी सही थे। उन्होंने कहा था कि अंतिम साँस तक प्रतिरोध करो लेकिन बिना हिंसक हुए। हिंसा से दुनियां ऊब चुकी है। ओह, भारत, आपको गांधी के योग्य होने की हिम्मत मिले।”

हो ची मिन्ह

“मैं और दूसरे लोग क्रांतिकारी होंगे, लेकिन हम सभी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से महात्मा गांधी के शिष्य हैं, इससे न कम, न ज्यादा।”
अंतिम प्रणाम

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इस लेख को पीयूष परमार ने आनंद ऋतुराज के साथ मिलकर तैयार किया है.

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कैमूर की पहाड़ियों के अंचल में पले-बढ़े पीयूष किशोरावस्था में पहुंच रहे थे कि बनारस आना पड़ा. जहां उनको पढ़ने के दौरान अपने से दोगुनी उम्र के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शोधछात्रों की सोहबत मिली. जाहिर है दिमाग दौड़ कर उम्र से आगे निकल गया. पीयूष रंजन परमार साहित्यिक गोष्ठियों और शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में ध्रुवतारा हो गये. दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया पर महानगर के कोलाहल को, शिक्षा-साधना के अनुकूल न पाकर उसी साल वापस काशी हिंदू विश्वविद्यालय लौट आये और यहां प्रवेश-परीक्षा के टॉपर के तौर पर राजनीति विज्ञान के छात्र बन गये. फिर चाहे पढ़ाई का मसला रहा हो या पाठ्येतर गतिविधियों का, तीन-साल-धुआंधार गुजारकर पीयूष पत्रकारिता की पढ़ाई करने भारतीय जनसंचार संस्थान वाया कानपुर पहुंच गये. गांधीवादी सिद्धांतों में अडिग विश्वास वाले पीयूष वर्तमान में मुंबई में रहते हैं और सोनी टीवी नेटवर्क में कार्यरत हैं. अभी तक वो 'पेशवा बाजीराव' और 'पहरेदार पिया की' धारावाहिकों की संकल्पना में शामिल रहे हैं.

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