जब गांधी की हत्या के बाद शोर मचा कि गांधी को...

साल 1998. इस साल एक फिल्म आई थी "दिल से." फिल्म के निर्देशक थे मणिरत्नम और इसके लिए गीत लिखे थे गुलजार ने. फिल्म...

संपादकीय: नोटों पर गांधी की तस्वीर छापकर सरकारें बजट में गांधी...

गांधी की यादों में डूबी 30 जनवरी, 1 फरवरी को हवा में उड़ा दी जायेगी. इसमें गांधी जैसा कुछ भी नहीं होगा. यह केवल...

गांधी को प्रासंगिक बता कर छल किया जाता है

इस बार भी 30 जनवरी को हम महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मना रहे हैं। यह गांधी जी की 70वीं पुण्यतिथि है। 30 जनवरी, 1948...

तो इसलिये मार दिया गया गांधी को!

मोहनदास करमचंद गांधी, यह नाम आधुनिक भारत के इतिहास को दो स्पष्ट काल खंडों में बांटता है- गांधी के समय का भारत और गांधी...

संपादकीय: महात्मा गांधी के भारत में प्रेम करना इतना मुश्किल कैसे...

जब जब प्यार पे पहरा हुआ है, ये इश्क और भी गहरा हुआ है. ये इश्क उस ऐसे इंसान से है जिसके नाम से भारत...

21वीं शताब्दी में युवा महात्मा गांधी से क्या सीख सकते हैं?

महात्मा गांधी स्वतंत्र भारत की आबोहवा में लगभग पाँच महीने से कुछ दिन ज्यादा जिंदा रहे। तमाम नेता और सुधारक जिस दिन चमकती दिल्ली...

बापू! क्या तुम दोबारा गुजरात में ही पैदा होना चाहते?

महात्मा गांधी के नाम एक वामपंथी का पत्र   मैं खांटी वामपंथी हूँ बापू, लेकिन न मालूम क्यों सालों से हर रोज तुम्हें महसूस करता हूँ......

कैसे गांधी को अपनी मृत्यु से बहुत पहले ही उसका आभास...

महात्‍मा गांधी की मृत्‍यु को लेकर एक सवाल मन में गूंजता रहता है कि वह किसी षडयन्‍त्र का परिणाम थी या प्रभु की लीला...

महात्मा गांधी की मौत पर मोहम्मद अली जिन्ना ने क्या कहा...

"अगर मुझे किसी पागल आदमी की गोली से भी मरना हो तो मुझे मुस्कराते हुए मरना चाहिये। मेरे दिलो-जुबान पर सिर्फ़ भगवान का ही...

क्यों महात्मा गांधी को एक बार फिर वापस लौटना चाहिये?

30 जनवरी 1948, दिन था शुक्रवार. बापू संध्याकालीन प्रार्थना के लिए जा रहे थे. रोज की तरह लोग जमा थे. प्रेमिल वातावरण था. तभी...

संपादकीय: क्या गोडसे जीत गया है ?

जिस गांधी को 50 सालों में अंग्रेज सरकार मार नहीं सकी, उसे हम आज़ाद भारत में 6 महीने भी ज़िंदा नहीं रख पाये। यह...

गोरख पांडेय: जिनके गीतों में क्रांति का बारूद भी है और...

समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई कांग्रेस से आई हो जनता से आई झंडा के बदली हो जाई... समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई... यह विशुद्ध भोजपुरी भाषी जिले...

कासगंज घटना: मृत युवक चंदन के पिता का बेटे के किसी...

गणतंत्र दिवस के दिन कासगंज में हुई सांप्रदायिक झड़प में एक युवक की सीने पर गोली लगने से मौत हो गई. युवक का नाम...

संपादकीय: क्या भारतीय गणतंत्र से ‘आजादी’ गायब हो चुकी है?

पता नहीं क्यों लेकिन जो एहसास 'आज़ादी' शब्द से मिलता हैं, वह 'लोकतंत्र' या 'गणतंत्र' से नहीं मिलता. आज़ादी के एहसास से जो खुमारी...

क्या वाकई मंत्री सत्यपाल सिंह और राम माधव चर्च के षड्यंत्र...

इस दुनिया में दो तरह के लोग पाए जाते हैं। पहले वो जो मानते हैं की ईश्वर हर चीज़ का कारण है और दुनिया...

संपादकीय: कासगंज के ‘हिंदू’ लड़के को किसने मारा?

कासगंज में कल एक लड़के की जान चली गई. एक सांप्रदायिक बताए जा रहे हंगामे के दौरान पथराव हुआ, गोलियां चलीं, आगजनी हुई और...

आईआईटी की टीम को रेलवे ट्रैक पर नहीं मिला कोई विस्फोटक,...

यह ख़बर 'द हिन्दू' अख़बार में छपी विजेता सिंह की रिपोर्ट 'कानपुर की रेल पटरियों पर कोई विस्फोटक नहीं: आईआईटी टीम' को आधार बनाकर...

पढ़ें कैसे देश के वैज्ञानिकों ने ली राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह की...

यह पत्र देश के चुनिंदा वैज्ञानिकों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह को कुछ दिन पहले उनके एक विवादित बयान के संदर्भ...

इस रिपोर्ट को पढ़ें, फिर कभी नहीं पूछेंगे कि सुभाष चंद्र...

सुभाष चन्द्र बोस आजादी की लड़ाई के सबसे मुखर और ओजस्वी नाम माने जाते हैं. उन्होंने न केवल देश में रहते हुए अपने विश्वासों...

लोकतंत्र में लोगों को अस्मिताओं की राजनीति से सावधान रहना जरूरी...

यह लेख द इंडियन एक्सप्रेस  के द आइडियाज पेज  पर छपे लेख प्राइड एंड प्रेज्यूडिस  की हिंदी में प्रस्तुति है. इस लेख को लिखने...