यह रिपोर्टिंग हमारे लिये अमन कुमार ने की है. अमन ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान से की है. इससे पहले उन्होंने इलाहाबाद से स्नातक किया है. सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर लगातार लिखते रहते हैं.

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पिछले सात दिनों से एसएससी मुख्यालय, दिल्ली के सामने हजारों की तादाद में जमे हुए छात्र एसएससी मुर्दाबाद, असीम खुराना चोर है के नारे लगा रहे हैं। यह आन्दोलन छात्रों का है एसएससी द्वारा आयोजित ग्रेजुएशन लेवल की एसएससी परीक्षाओं में हो रही धांधली के खिलाफ है। अपने घर-गाँव से निकल कर एक सरकारी नौकरी हासिल करने की चाहत में भोले भाले छात्र दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं। ऐसे में उनके सपने सरकार की लापरवाही और व्यवस्था को घुन बन कर चाट रहे घोटालों की भेंट चढ़ रहे हैं।
17 फरवरी से 21 फरवरी तक हुई एसएससी टियर-2 की परीक्षा के पेपर आउट हुए हैं, लेकिन परीक्षा सिर्फ 21 तारीख की रद्द करवाई गई। इसके अलावा उनका कहना है कि पिछले कुछ समय से परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले सख़्त जाँच के बावजूद एसएससी की परीक्षाओं के क्वेश्चन पेपर और आंसरशीट के स्क्रीनशॉट बाहर आ रहे हैं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक ओर जहाँ मोदी सरकार सरकारी नौकरियों में कटौती करती जा रही है, वहीं बची-खुची नौकरियों में ऐसी गड़बड़ियां देश के युवाओं को भविष्य और रोजगार के लिहाज से असुरक्षित और बड़े असमंजस की स्थिति में डाल रही है। छात्रों का कहना है कि एसएससी पेपर लीक होने की सीबीआई जांच कराए और 17 से 22 फरवरी को जो परीक्षा आयोजित की गई थी उसको कैंसल कर दोबारा से नकलविहीन परीक्षा आयोजित करे।
टियर-2 की परीक्षा दे रहे सुजीत ने बताया कि जब वे 21 तारीख को गणित का पेपर देने गए तो 9:45 के लगभग सेंटर पर मौजूद कुछ लोगों के पास सचिन चौहान और सुमन कुमारी के मोबाईल के स्क्रीन शॉट आने लगे जिसमें उस दिन के पेपर की आंसर शीट थी। सुजीत का कहना है कि जब पेपर किसी को पता ही नहीं सेंटर के अन्दर जाने पर बेल्ट, पर्स और जूते तक बाहर करवा दिए जाते हैं ऐसे में पेपर और उसकी आंसर शीट पहले से कैसे पता चली?
पेपर लीक के मुद्दे पर एसएससी के अफसरों का कहना है कि पेपर लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई है बल्कि किसी कम्प्यूटर में गड़बड़ी की वजह से ऐसा हुआ है। वहीं अफसरों का ये भी कहना है कि घटना की जानकारी होने पर पेपर रद्द कर दिया गया है जिसकी अगली तारीख 9 मार्च रखी गई है।

पेपर लीक के मुद्दे पर पटना से दिल्ली एसएससी की तैयारी करने आए रोहित मौर्या का कहना है कि एसएससी की परीक्षाओं में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है, ऐसी कोई परीक्षा नहीं है जिसमें घोटाले न होते हों। पैसे देकर पहले से पेपर प्राप्त कर लेना आम बात हो गई है, पेपर लीक होने में और कोई नहीं बल्कि एसएससी के बड़े अफसर ही शामिल हैं जो पैसे लेकर पेपर पहले उपलब्ध करा देते हैं।
पिछले सात दिनों से आन्दोलन कर रहे छात्र एसएससी पर घोटाले के आरोप लगा रहे हैं, उनका कहना है कि एसएससी के अफसर, पेपर आयोजित कराने वाली ठेकेदार कंपनी और नकल माफियाओं का गिरोह छात्रों से पैसे लेकर पेपर पहले ही या उसी दिन उपलब्ध करा देता है जिससे नकल करने में आसानी होती है। कुछ लोग पैसे देकर सरकारी नौकरी का सपना पूरा कर ले रहे हैं वहीँ हम जैसे गरीब जो कर्ज लेकर या अपनी जमीन बेचकर पढ़ाई कर रहे हैं उनके हाथ में कुछ नहीं आता।
इलाहाबाद में रहकर एसएससी की तैयारी करने वाले प्रदीप का कहना है कि ‘एसएससी ने जिस “जिफ़ी” कंपनी को पेपर आयोजित कराने का ठेका दिया है उसकी विश्वसनीयता पर संदेह है। “जिफ़ी” कंपनी के सॉफ्टवेयर को “एनिड़ेस्क सॉफ्टवेयर” के जरिए बाहर कहीं कम्प्यूटर पर बैठकर रिमोट तकनीकी के जरिए हैक किया जा सकता है। सबसे पहले एसएससी इस कंपनी का पेपर आयोजित कराने वाला ठेका रद्द कर किसी दूसरी कंपनी को दे जिससे बेहतर और विश्वसनीय ढंग से पेपर आयोजित हो सके।’
विरोध में छात्रों ने लगाए बैनर
एसएससी की तैयारी कर रहे छात्रों का यह आन्दोलन पूरे देश में फ़ैल रहा है छात्र इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली में एसएससी ऑफिस के बाहर लगभग दो हजार छात्र एसएससी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के अलावा इलाहाबाद,पटना और जयपुर हर जगह अपनी मांगों को लेकर छात्र सड़कों पर उतर आये हैं। दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के पास सीजीओ कॉम्प्लेक्स के बाहर देश भर से आए छात्र एसएससी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं पटना में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने राजेन्द्र नगर रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर ट्रेनों की आवाजाही को बाधित कर दिया है।
छात्रों की मांग को स्वराज इंडिया के योगेन्द्र यादव, बिहार के सांसद पप्पू यादव, दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी आम आदमी पार्टी की नेता अलका लाम्बा ने समर्थन दिया है। मनोज तिवारी ने आश्वासन दिया की SSC परीक्षा में हुई धांधली को मान गयी है और एसएससी, सीबीआई (CBI) से जांच करवाने के लिए कार्मिक मंत्रालय से सिफारिश करेगी। संघर्षरत छात्रों के अनुसार छात्रों के लिए सलाहकारी भूमिका निभाने वाले योगेन्द्र यादव का कहना है की जब तक सरकार या सुप्रीम कोर्ट लिखित में सीबीआई से जांच कराने की अनुमति नहीं दे देती तब तक सरकार पर भरोसा करना बेवकूफी होगी। इसके साथ एसएससी में हो रही धांधली पर सीबीआई जांच का आदेश देने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी राज़ी हो चुका है।
सीबीआई जांच की मांग मान ली गई है, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया है कि सीबीआई, एसएससी द्वारा आयोजित पूरे कैलेंडर वर्ष की परीक्षाओं की जांच करेगी या 17 से 21 फ़रवरी तक के पेपरों की। छात्रों का कहना है कि जब तक पूरे कैलेंडर वर्ष की परीक्षाओं की जांच की मांग नहीं मानी जाती वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।

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